Faridoon Shahryar's Blog


Tuesday, March 10, 2020

अनाथ रात

अनाथ रात
फ़रिदून शहरयार की नज़्म 

खौफ़ में लिपटी बदहवास रात 
चीखों से गूंजती अनाथ रात
दहशतगर्द हैं सड़कों की रोनक़
लहू में नहाई खौफ़नाक रात 
अंधेरा है हद ए निगाह के भी आगे
नारों की जंग है ये डर की रात
सवेरे पर पहरा लगाए बैठा है जानवर 
जोश ए जुनून के सहारे है लाचार रात
उजालों से गुरेज़ है इक हुक्मरान को
नाकामी के तख्त पर है आवारा रात

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